एक शॉट में सिर्फ़ एक कैमरा मूव ज़रूरी नहीं। समय साफ़ लिखकर उसी शॉट में पहले पुश-इन, फिर रुकावट, फिर ऑर्बिट या ऊपर उठना जोड़ें।
| चाहिए |
ऐसे कहें |
क्या जाँचें |
| सेगमेंटेड पुश |
“0–2 सेकंड में धीरे पास आओ, 2–3 सेकंड रुको, 3–6 सेकंड में दाईं तरफ़ घूमते हुए ऊपर उठो।” |
हर हिस्से का शुरू-अंत सही है या नहीं; रुकने पर फ्रेम सच में स्थिर है या नहीं |
| पीछा, पर चिपके बिना |
“किरदार A को फॉलो करो; दरवाज़े में दूरी घटाओ, बाहर निकलकर बढ़ा दो।” |
दूरी का बदलाव सहज है और पात्र फ्रेम में है या नहीं |
| सिर और शरीर अलग |
“पहले खिड़की की तरफ़ देखे, फिर दूसरे सेकंड पर उठकर दरवाज़े तक चले।” |
सिर, शरीर और पैर अलग-अलग बीट पर चलें, सरकते न दिखें |
| बैठकर बात |
“यह बैठकर होने वाली बातचीत है; दोनों सिर घुमा सकते हैं और इशारे कर सकते हैं, बीच में खड़े न हों।” |
बैठी मुद्रा बनी रहे; हाथ मेज़ या दूसरे पात्र से न टकराए |
फॉलो रिदम के लिए पथ पर कीफ़्रेम जोड़ें और समय के साथ दूरी, एंगल या ऊंचाई बदलें। बन जाने पर दरवाज़े, मुड़ने और बैठने जैसे जोड़ों को स्लो में देखें; वहीं गति अचानक तेज़ दिखती है।
DOTV प्रीविज़ में आम दिक्कतें भी बताता है: कैमरा दीवार, फर्नीचर या पात्र के बहुत करीब है, पात्र फ्रेम से बाहर जा रहा है, प्रॉप दीवार में घुस रहा है, या बैठा पात्र गलती से खड़ा कर दिया गया है। पहले उस शॉट का फ्रेम देखें, फिर तय करें कि पथ बदलना है, जगह बदलनी है या सिर्फ़ उस कीफ़्रेम का एक्शन। यह जाँच आपकी पसंद तय नहीं करती; यह सिर्फ़ फ़ाइनल वीडियो में बेकार दिखने वाली गलतियाँ पहले बताती है।